Thursday, 18 October 2012

पेड़े (मथुरा वाले)


पेड़े (मथुरा वाले)


जिसने खाए है वो यही कहता है कि मथुरा के पेड़े से अच्छा और स्वादिष्ट पेड़ा कहीं और नहीं मिलते, ये आम पेड़ों से अलग ब्राउन रंग के होते है. तो आईये आज हम आपको मथुरा जी के पेड़े बनाना सीखते हैं.

पारम्परिक मथुरा जी के पेड़े बनाने के लिये मावा और पीसी हुई चीनी का उपयोग होता है,  मावा और पीसी हुई चीनी आप बाजार से ला सकते हैं ध्यान दे कि मावा दानेदार लेकर आयें और पीसी हुई चीनी (बूरा) आप घर पर बना सकते है, ये भी दानेदार होना चाहिए.

मथुरा जी के पेड़े बनाते समय मावा को अधिक से अधिक भूना जाता है.  मावा भूनते समय बीच बीच में थोड़ा थोड़ा दूध या घी डालते रहते हैं जिससे इसे अधिक भूनना आसान हो जाता है. भूनते समय मावा जलता नहीं और मावा का कलर हल्का ब्राउन हो जाता है, मावा जितना अच्छा भुनता है स्वाद भी उतना ही अच्छा होता है. आइये बनाना शुरू करते हैं मथुरा के पेड़े.

आवश्यक सामग्री -

खोया या मावा - 250 ग्राम
पीसी हुई चीनी (बूरा) - 250 ग्राम
घी - 2 टेबल स्पून या 1/4 कप दूध
छोटी इलाइची पाउडर - एक बड़ा चम्मच

विधि -

कढ़ाई में मावा डाल कर भूनिये (कढ़ाई भारी तले की होनी चाहिए),भूनते समय लगातार कलछी से चलाते हुये भूनिये मावा कढ़ाई में लगना नहीं चाहिये, जब मावा भुनते भुनते रंग बदलने लग जाय तब उसमें थोड़ा थोड़ा सा घी या दूध मिलाते रहिये और चला चला कर तब तक भूनिये जब तक कि वह ब्राउन कलर का न हो जाय. मथुरा के पेंडो के लिए मावा ब्राउन कलर का होना चाहिए.

मावा को ठंडा होने दीजिये, जब ये ठंडा हो जाय तब उसमें 200 ग्राम बूरा डाल कर अच्छी तरह मिलाइये, इलाइची पाउडर भी इस मिश्रण में मिला दीजिये. साधारण पेड़ों की तुलना मे मथुरा के पेड़ों मे इलायची ज़्यादा होता है. पेड़े का मिश्रण तैयार है.

बचा हुआ 50 ग्राम बूरा एक प्लेट में निकालिए. मिश्रण से थोड़ा सा मिश्रण एक छोटे नीबू के बराबर निकालिये और हाथ में लेकर गोल  करके, हाथ से दबा कर, पेड़े का आकार दीजिये,  पेड़े को प्लेट में रखे हुये बूरे में लपेटिये और अपने दोंनो हाथों की हथेलियों से पेड़े को हल्का सा दबाकर प्लेट में रखते जाइए, आपके लाजबाव मथुरा के पेड़े तैयार हैं.

पेड़े को 2-3  घंटे के लिये खुले पंखे की हवा में छोड़ दीजिये, ये थोड़े खुश्क हो जायेंगे.  अब आप इनको एअर टाइट कन्टेनर में भर कर, फ्रिज में रख दीजिये. यदि मावा अच्छी तरह भूना गया है तो ये पेड़े आप 15 दिन भी रख कर खा सकते हैं. सर्दियों के दिनों मे आप इन्हे बाहर हो रख सकते है.

नोट: मथुरा के पेड़े पारंपरिक तरीके से गाय के दूध के खोए से बनाए जाते है, यह उपलब्ध ना होने पर भैस के दूध का खोया भी इस्तेमाल कर सकते है.

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