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Saturday, 20 October 2012

स्पॉंजी रसगुल्ले


स्पॉंजी रसगुल्ले


बंगाली स्पॉंजी रसगुल्ले बहुत ही टेस्टी होते है और मुह मे रखते ही घुल जाते है, आज हम बंगाली स्पंज रसगुल्ले बनायेंगे लेकिन इन्हे जल्दी बनाने के लिये कुकर मे बनायेंगे.

आवश्यक सामग्री - 

दूध - 1 लीटर 
चीनी - 300 ग्राम 
नीबू का रस - दो नीबू का रस 

विधि - 
किसी बर्तन मे दूध डालकर गरम करने के लिये रखिये. दूध में उबाल आने पर दूध को उतार लीजिये, और थोड़ा सा ठंडा कर लीजिये मतलब दूध को 80 प्रतिशत तक गरम रहने दीजिये. नीबू के रस में जितना रस है, उतना ही पानी मिला दे अब .

दूध में  1 - 1 टेबल स्पून करके नीबू का रस डाले और मिक्स करे, दूध के अच्छी तरह फटने तक नीबू का रस डालते जाइए और मिक्स करते जाइये, जब दूध अच्छी तरह फट जाय रस डालना बन्द कर दीजिये, और फटे हुये दूध को किसी सूती कपड़े से छान लीजिये. छैना कपड़े में रह जायेगा. छैना के ऊपर 1-2 कप ठंडा पानी डालिये, छैना ठंडा भी हो जायेगा और छैना से नीबू का खट्टा स्वाद भी निकल जायेगा. कपड़े को चारों ओर से उठाकर, हाथ से छैना को दबाते हुये छैना से सारा पानी निचोड़ दीजिये.  सॉफ्ट छैना बनकर तैयार है.

अब छैना को किसी बर्तन में निकालिये, हाथ से छैना को दबाते हुये, पलट पलट कर 4-5 मिनिट तक मल कर नरम और चिकना कीजिये. अब छैना को 10 - 12, भागों में बांट लीजिये. एक भाग उठाइये और हाथ से लड्डू की तरह दबाकर पहले उसे बाइन्ड कीजिये, और अब गोल आकार देकर चिकना कीजिये. सारे गोले बनाकर तैयार कर लीजिये.

रसगुल्ले कुकर में पका लीजिये, कुकर में रसगुल्ले बहुत जल्दी पक जाते हैं रसगुल्ले पकाने के लिये, ज्यादा तापमान की आवश्यकता होती है..

अब कुकर में चीनी, 4 कप पानी डालिये, इसमे उबाल आने दीजिये, उबाल आने पर छैना के बने गोले कुकर में एक एक करके डालिये, और कुकर का ढक्कन बन्द कर दीजिये. 1 सीटी आने के बाद, गॅस को थोड़ा कम कर दिजिये, और रसगुल्ले को 7-8 मिनिट तक पकाने के बाद गॅस बन्द कर दीजिये.

कुकर को नल के नीचे लगा दीजिये, ताकि वह जल्दी से ठंडा हो जाय और खुल जाय. सावधानी से ढक्कन खोलिये, कुकर से रसगुल्ले चाशनी के साथ निकाल कर किसी प्लेट में रखिये और रसगुल्ले को 5-6 घंटे के लिए ठंडे होने दीजिये, फिर इन्हे ठंडा ठंडा परोसिये और खाइये.

स्पंज रसगुल्ले को आप फ्रिज में 7 दिन तक रख सकते हैं.

नोट:
(1) छैना के गोले अगर उबलते पानी में न डाले जायें तो बे टूट कर बिखर जाते हैं. रसगुल्ले उबालते समय पानी में हमेशा उबाल रहना आवश्यक है. 
(2) छैना बनाने के लिये दूध को थोड़ा ठंडा अवश्य करें. एसा करने से छैना नरम बनता है, और रसगुल्ले अच्छे स्पंजी बनते हैं.छैना अगर सख्त हो तो रसगुल्ले भी सख्त बनेगे या बिखर जाएँगे.

इस रेसिपी से सबंधित प्रश्ना, सुझाव एवं अनुभव हमे लिखे.

Saturday, 13 October 2012

रबड़ी


रबड़ी




रबड़ी   उत्तर भारत में अधिक पसंद की जाती हैं. रबड़ी का स्वाद लाजबाव होता है. खाना खाने के बाद रबड़ी खाने का मज़ा  कुछ और ही है. इसे  मालपुआ, जलेबी और इमरती के साथ भी खाते हैं.
आइये आज हम रबड़ी बनाए.

आवश्यक सामग्री - 

दूध - 1 लीटर फुलक्रीम
चीनी -50 ग्राम
छोटी इलाइची - 2-3 (छील कर कूट लीजिये)

विधि - 

 रबड़ी बनाने के लिए कढ़ाही भारे तले की होनी चाहिये. दूध को कढ़ाही में डालकर गरम करने रखिये, दूध में उबाल आने पर गैस धीमी कर दीजिये.

दूध पर मलाई की हल्की परत  जैसे ही आये कलछी से उठाकर, कढ़ाही के किनारे लगा दीजिये. थोड़ी देर बाद फिर से दूध के ऊपरी सतह पर मलाई आ जाएगी इसे भी उठाइये और किनारे पर लगा दीजिये.  दूध को धीमी गैस पर  उबलने दीजिये और  मलाई की परत को कढ़ाही के किनारे लगाते रहिये.  कढ़ाही के किनारे जमी मलाई की परत सूख कर खुश्क होती रहेगी,  बार बार यही करना है, जब मलाई कढ़ाही के चारों ओर इकठ्ठी हो जाय और कढाई में दूध गाड़ा होकर एक तिहाई ही बचे तो बचे दूध में  चीनी और इलाइची पाउडर मिलाइये और  लगभग2 मिनिट बाद गैस बन्द कर दीजिये   कलछी से कढ़ाही के किनारों से मलाई खुरचकर निकालिये और उस गाड़े दूध में ही मिला दीजिये. खुरची हुई मलाई की परत (खुरचन) को दूध में मिलाते समय अधिक मत चलाईये ताकि रबड़ी में खुरचन की गांठे पड़ी रहें. लीजिये रबड़ी तैयार हो गई है. रबड़ी को किसी बरतन में निकालिये और फ्रिज में रख कर ठंडा कीजिये, खाना खाने के बाद ठंडी ठंडी रबड़ी खाइये.

रबड़ी को फ्रिज में रखकर 2 दिन तक खा सकते हैं.

 नोट:- (1) रबड़ी बनाते समय ध्यान रहे कि चमचे से मलाई निकालने के बाद  दूध को भी तले तक  चला दीजिये, दूध कढ़ाई के तले में नहीं लगना चाहिये, गैस को तेज न रखे, नहीं तो जो मलाई किनारे पर लगा कर रखी है वह जल जायेगी.
(2) यदि आप चाहे तो रबड़ी के उपर कतरा हुआ पिसता डाल कर भी सर्व कर सकते.
(3) अगर रबरी जलेबी या मालपुए के साथ खाने के लिए बनाए तो चीनी की मात्रा थोड़ी कम कर दीजिए .
 

Thursday, 4 October 2012

घर पर घी बनाए


घर पर घी बनाए :-

 

 

 

                 हम सभी घी का उपयोग रोज़ाना करते है पर आज कल बाज़ार मे शुद्ध देसी घी मिलना बहुत मुश्किल है. आपने अक्सर मिलावटी या नकली घी के बारे मे सुना होगा. इसलिए आज हम आपको घर पर ही घी बनाने की विधि सिखाएगे. घी बनाना बहुत ही आसान है ओर इसमे ज़्यादा समय भी नही लगता साथ ही साथ आपकी ये समस्या भी ख़तम हो जाएगी की मलाई का क्या किया जाए क्योकि बच्चे इसे दूध मे पीना पसंद नही करते ओर बड़े वजन बढ़ जाने के डर से नही खाते.

विधि: 
घी बनाने के लिए हमे दूध (फुल क्रीम दूध) गरम करने के बाद उसको जाली ढककर रखना चाहिए ताकि उसके उपर मलाई आ जाए और ठंडा हो जाए जब दूध ठंडा हो जाए इसे फ्रिज मे रख दे .5 -6 घंटे बाद आप देखेंगे की मलाई काफ़ी मोटी हो गई है, अब इस मलाई को उतार कर किसी बड़े कटोरे मे इकट्ठा करे इस प्रकार 8-10 दिन (मलाई के मात्रा के अनुसार) मलाई को इकट्ठा कर ले. मलाई को हमेशा फ्रिज मे ही रखे अन्यथा वह खराब हो जाएगी. जिस दिन आप घी बनाना चाहे रात को मलाई को गॅस पर गरम करे (जैसे हम दही जमाने के लिए करते है) ओर उसमे दो चम्मच दही डाल कर मिला दे ओर ढक कर रख दे . सुबह तक ये दही की तरह जम कर तैयार हो जाएगी .

अब इस मलाई को एक बड़े भिगोने मे डाले (पहले चित्र की तरह) और इसमे दो से ढाई ग्लास सादा पानी डालकर  हॅंड बलेंडर (या रई या मथानी ) से बिलोये (दूसरे चित्र की तरह) और इसको तब तक बिलोए जब तक की इससे मक्खन अलग ना हो जाए. यह आपको उपर नज़र आने लगेगा  (तीसरे चित्र के अनुसार) अब इसको 10 से 15 मिनिट के लिए छोड़ दे और 15 मिनिट बाद फिर से बलेंडर से 5-7 मिनिट चलाए. जब मक्खन पूरी तरह से अलग हो जाए तब ब्लॅंडर को बाहर निकाल ले ओर भगोने मे बर्फ डाले, पूरी ट्रे बर्फ डाल दीजिए. बर्फ डालने से मक्खन थोड़ा टाइट हो जाता है ओर इसे उठाना आसान हो जाता है. जब बहुत ज़्यादा गर्मी (मई,जून) होती है तो  बिलोने पर मक्खन मोटा-मोटा नज़र नही आता बल्कि घी जैसा पतला तैरता हुआ नज़र आता है, तब आप इसे लगभग 10 मिनिट बिलोने केबाद इसमे बर्फ या ठंडा पानी डाल दे (बर्फ हो तो ज़यादा अच्छा) ओर 5-7 मिनिट ओर बिलोए मक्खन टाइट हो कर उपर तेरने लगेगा. अब इसे हाथ से उठा कर कड़ाही मे निकाल कर रख ले. ऐसे ही जब बहुत ज़्यादा सर्दी (दिसंबर,जनवरी) होती है तो  बिलोने पर मक्खन अलग नही होता और हमे पतला मट्ठा ही नज़र आता है तो इसे लगभग 10 मिनिट बिलोने केबाद इसमे एक से डेड गिलास गर्म पानी डाल दे (पानी न तो कम गरम होना चाहिए और न ही खोलता हुआ बल्कि पानी इतना गरम डालिए की आपकी मलाई हल्की गरम हो जाए इससे घी और मट्ठा अलग अलग हो जाएगा) और 5-7 मिनिट (या मक्खन आने तक) ओर बिलोए मक्खन अलग होकर उपर तेरने लगेगा. अब इसे हाथ से उठा कर कड़ाही मे निकाल कर रख ले.

अब इस कड़ाई को गॅस पर रख दे और मीडियम आग पर पकने दे, शुरू मे गॅस को बिल्कुल धीमा ही रखे ताकि मक्खन उफन कर बाहर ना आए. जब वो खोंलने लगे तो आग मीडियम पर करके पकने दे (पाँचवे चित्र मे ध्यान से देखिए). लगभग 15 से 20 मिनिट मे आपको क्लियर घी अलग हल्के पीले रंग का दिखने लगेगा (6th चित्र मे ध्यान से देखिए). अब गॅस बंद कर दीजिए ध्यान दे की घी का पीला रंग आने बाद ज़्यादा नही पकना है वरना घी जलने लगेगा इसेसे घी मात्रा भी कम होगी और इसका रंग भी हल्का ब्राउन हो जाएगा और इसके स्वाद मे भी फ़र्क आ जाएगा.

अब स्टील का एक डिब्बा या बर्तन लीजिए इसके मुह पर पतला साफ कॉटन का कपड़ा बंधीए (जैसे हम आचार की बर्नी पर बाँधते है) और घी को चमचे की सहायता से छान लीजिए. या फिर आप बारीक छेद वाली स्टील की छन्नी से भी छान सकते है ये आसान भी है.

लीजये आपका शुद्ध देसी घी तैयार है. अच्छी तरह से पका हुआ घी कई महीनो तक इस्तेमाल किया जा सकता है.


नोट: मक्खन निकालने के बाद भिगोने मे जो मट्ठा (छाछ) बचा है उसे कढ़ी बनाने मे या भूना जीरा पाउडर व काला नमक मिलकर पीने के लिए इस्तेमाल कर सकते है. इस्तेमाल से पहले इसे छान ले.  

इस रेसिपी से सबंधित प्रश्ना, सुझाव एवं अनुभव हमे लिखे.